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Pages: 238-250
Harpal Singh (Department of Political Science, Sai Nath University, Ranchi)
भारतीय पंचायती राज संस्थाओं की आधारभूत विशेषता यह रही है कि यह मुख्यतः स्वशासी संस्थाएं थी। यद्यपि इनका सामाजिक परिवेश कठोर सामाजिक संरचना का था। प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक युगों के बीच पंचायतों के विकास में उतार-चढ़ाव आते रहे। यू तो प्राचीन काल से ही स्वशासीत गांवों की उपस्थिति रही है, लेकिन ‘स्थानीय निकायों की अवधारणा’ का विकास आधुनिक काल में हुआ। 20वीं सदी से पहले आमतौर पर शहरों या कस्बों में ही स्थानीय निकायों का गठन होता था।
Pages: 238-250
Harpal Singh (Department of Political Science, Sai Nath University, Ranchi)