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Pages: 1039-1041
शोएब हसन व तन्वांगी मणि त्रिपाठी (दी.द.उ. गोरखपुर विश्वविदयालय, गोरखपुर )
सदियों से क्षमा को एक, धार्मिक, दार्शनिक और व्यक्तिगत पहलू से अपने भावात्मक, संज्ञानात्मक, व्यवहारात्मक, नैतिक और सांस्कृतिक सुविधाओं के संबंध में विचार-विमर्श किया जाता रहा है । आधुनिक मनोवैज्ञानिक साहित्य में इस पर व्यापक शोध कार्य हो रहा है । वर्तमान समय की यह मांग है कि हम न केवल व्यक्तियों, समुदायों बल्कि राष्ट्रों को भी क्षमा रूपी मूल्य से अवगत कराएं, बल्कि इसके उपयोग पर भी बल दें ।अतरू प्रस्तुत शोध-पत्र में क्षमा की उपयोगिता, तथा उससे होने वाले शारीरिक व मानसिक लाभ से परिचित कराने का प्रयास किया गया है ।प्रासंगिक साहित्य की समीक्षा से उत्पन्न निष्कर्षों से यह पता चलता है कि हम क्षमा को सशक्त टूल के रूप में उपयोग कर न केवल अपने शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा कर सकते हैं, अपितु उसका विकास भी कर सकते हैं ।क्षमा के माध्यम से अनेक मानसिक स्वास्थ्य से सम्बंधित लाभों को प्राप्त किया जा सकता है ।
Pages: 1039-1041
शोएब हसन व तन्वांगी मणि त्रिपाठी (दी.द.उ. गोरखपुर विश्वविदयालय, गोरखपुर )